हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, मजलिस-ए-ख़ुबरगान-ए-रहबरी (नेतृत्व के विशेषज्ञों की परिषद) के सदस्य हुज्जतुल-इस्लाम वल-मुस्लिमीन सय्यद मुहम्मद महदी मीरबाक़री ने हज़रत फ़ातिमा मा'सूमा (स) के पवित्र हरम में मुहर्रम की दूसरी रात की मजलिस में कहा कि इमाम हुसैन (अ) के ख़ून का असली बदला हज़रत वली-ए-अस्र (अ) के ज़ुहूर और बातिल व शैतानी तंत्र के पूर्ण विनाश के साथ पूरा होगा, और आज ईरान समेत सभी ईमानवाले इसी विशाल ईश्वरीय कार्य-योजना पर चल रहे हैं।
उन्होंने सूर ए नबा की व्याख्या करते हुए कहा कि क़ुरआन-ए-करीम में वर्णित "नबअ ए अज़ीम" की तफ़सीर अहल-ए-बैत (अ) की रिवायतों में अमीरुल-मोमेनीन हज़रत अली (अ) की विलायत और विशेष रूप से इमाम ज़माना (अ) के ज़ुहूर से की गई है। यह इतनी महान घटना है कि कुछ रिवायतों के अनुसार ईमान के पक्के लोग भी इसकी भव्यता के कारण परीक्षा और संदेह में पड़ सकते हैं।
आयतुल्लाह मीरबाक़री ने कहा कि अल्लाह तआला ने सारी कायनात को इसी महान उद्देश्य के लिए पैदा किया है और समस्त अस्तित्व-व्यवस्था "यौम-उल-फ़स्ल" की ओर अग्रसर है। उन्होंने स्पष्ट किया कि रिवायतों में "यौम-उल-फ़स्ल" की व्याख्या इमाम महदी (अ) के ज़ुहूर और हक़ व बातिल के निर्णायक अंतर के दिन के रूप में की गई है, जब ईमानवालों को उनका इनाम और ज़ालिम व सरकश तत्वों को उनके कर्मों की सज़ा मिलेगी।
उन्होंने कर्बला की घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि हज़रत ज़ैनब (स) ने इब्न-ए-ज़ियाद के दरबार में अत्यधिक कष्टों के बावजूद कहा: "मा रऐतु इल्ला जमीलन" अर्थात "मैंने अल्लाह के कार्य में सौंदर्य एवं भलाई के अलावा कुछ नहीं देखा।" उनके अनुसार आशूरा कोई सीमित घटना नहीं, बल्कि एक महान ईश्वरीय योजना का हिस्सा है जो क़ायम-ए-आल-ए-मुहम्मद (अ) के ज़ुहूर तक जारी रहेगी।
मजलिस-ए-ख़ुबरगान के सदस्य ने कहा कि शैतान और बातिल ताकतें हज़ारों वर्षों से इस ईश्वरीय योजना का विरोध करती आई हैं, लेकिन अल्लाह का वादा है कि अंततः हक़ को प्रभुत्व प्राप्त होगा। उन्होंने कहा कि अल्लाह के पैग़म्बरों के दुश्मन हमेशा से रहे हैं और दुनिया में उन्हें शोर-ओ-ग़ुल मचाने की मोहलत दी गई है, लेकिन निर्णायक दिन केवल हक़ की आवाज़ ही बुलंद होगी।
आयतुल्लाह मीरबाक़री ने आगे कहा कि जिस व्यक्ति की नज़र इस महान ईश्वरीय योजना पर हो, वह कभी हार का एहसास नहीं करता। इसी कारण कर्बला के कैदी सबसे कठिन परिस्थितियों में भी कमज़ोर नहीं पड़े। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि आज भी ईमानवालों को धैर्य, अंतर्दृष्टि और दृढ़ता के साथ इसी राह पर स्थिर रहना चाहिए। उनके अनुसार दुश्मन कुछ शहादतों को अपनी सफलता समझ सकता है, लेकिन इलाही मंसूबा जारी रहता है और अल्लाह तआला का वादा है कि वह अपने रसूलों और ईमानवालों की सहायता करेगा, अतः सफलता अंततः हक़ के हिस्से आएगी।
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